पूर्व सैनिक कलम सिंह बिष्ट को सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना मुख्यालय, दिल्ली में किया सम्मानित। - Pahadvasi

पूर्व सैनिक कलम सिंह बिष्ट को सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना मुख्यालय, दिल्ली में किया सम्मानित।

-पूर्व नायक कलम सिंह बिष्ट के असाधारण जीवन और उनकी हालिया उपलब्धि पर आधारित है।

-पूर्व सैनिक नायक कलम सिंह बिष्ट COAS, GOC-in-C, Governor Awarded, (Ultra Trail Runner Gold Madelist, Social Worker, Founder of MUNDOLI RDERS CLUB)

हिमालय का ‘अल्ट्रा रनर’: सेना प्रमुख ने किया सम्मानित, किराए के घर में रहकर गढ़ रहे हैं निर्धन बच्चों का भविष्य

देहरादून। भारतीय सेना के शौर्य और अनुशासन की गाथाएं अक्सर युद्ध के मैदान में लिखी जाती हैं, लेकिन कुछ योद्धा सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा के ऊंचे शिखरों पर अपनी विजय पताका फहराते हैं। इन्हीं में से एक नाम है पूर्व नायक कलम सिंह बिष्ट।

हाल ही में, भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी, PVSM, AVSM ने सेना मुख्यालय, दिल्ली में कलम सिंह बिष्ट को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों और समाज के प्रति उनके निस्वार्थ योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल एक सैनिक के कौशल का है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का है जिसने मुश्किलों को कभी अपनी प्रगति के आड़े नहीं आने दिया।

नूरनांग के वीर से ‘अल्ट्रा रनर’ तक का सफर

कलम सिंह बिष्ट भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 4th गढ़वाल राइफल्स (नूरनांग) बटालियन से सेवानिवृत्त हुए हैं। यह वही बटालियन है जिसका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। सेना की इसी कड़ी ट्रेनिंग और जज्बे ने उन्हें एक ‘अल्ट्रा ट्रेल रनर’ (Ultra Trail Runner) के रूप में नई पहचान दी। आज वे पहाड़ों की दुर्गम पगडंडियों पर अपनी रफ्तार से न केवल रिकॉर्ड बना रहे हैं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत भी बन गए हैं।

‘मुन्दोली  राइडर्स क्लब’ की स्थापना: युवाओं को नई दिशा

पहाड़ के युवाओं में खेल और अनुशासन की भावना जगाने के उद्देश्य से कलम सिंह ने ‘मुन्दोली राइडर्स क्लब’ (MUNDOLI RiDERS CLUB) की स्थापना की। इस क्लब के माध्यम से वे ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को खेल और साहसिक गतिविधियों से जोड़ रहे हैं, ताकि वे नशे और भटकाव से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।

अभावों में भी सेवा का जज्बा: किराए का कमरा, बड़ा दिल

कलम सिंह बिष्ट की कहानी जितनी गौरवशाली है, उतनी ही भावुक भी। एक तरफ जहां उन्होंने देश का मान बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर वे आज भी देहरादून में अपनी पत्नी पुष्पा देवी, बेटे प्रमोद बिष्ट और बेटी दीप्ति के साथ एक किराए के कमरे में रहते हैं। उनके पास अपना कोई निजी घर नहीं है, लेकिन उनके पास एक बहुत बड़ा सपना और अटूट संकल्प है।

उनका पूरा परिवार आज हिमालयी क्षेत्र के गरीब और वंचित बच्चों के उत्थान में जुटा है। वे उन बच्चों की मदद करते हैं जिनके पास शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। कलम सिंह का मानना है कि “एक सैनिक कभी रिटायर नहीं होता। वर्दी भले ही उतर जाए, लेकिन देश और समाज की सेवा का संकल्प अंतिम सांस तक रहता है।”

सेना प्रमुख ने थपथपाई पीठ

सेना मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कलम सिंह बिष्ट से मुलाकात की और उनके सामाजिक कार्यों की सराहना की। सेना प्रमुख ने उनके द्वारा संचालित सामाजिक कार्यों और अल्ट्रा रनिंग में उनकी उपलब्धियों को सेना के प्रत्येक जवान के लिए एक उदाहरण बताया।

हिमालयी क्षेत्र के लिए एक आशा की किरण

कलम सिंह बिष्ट केवल एक पूर्व सैनिक नहीं हैं, बल्कि वे उन हजारों बच्चों के लिए एक उम्मीद हैं जिन्हें वे ‘मुन्दोली राइडर्स क्लब’ और अपने सामाजिक कार्यों के जरिए बेहतर भविष्य दे रहे हैं। कठिन परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के बावजूद, बिष्ट परिवार का यह निस्वार्थ प्रयास उत्तराखंड और पूरे देश के लिए एक मिसाल है।

मुख्य बिंदु:

 🌟 यूनिट: 4th गढ़वाल राइफल्स (नूरनांग)।

 🌟 सम्मान: सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा सम्मानित।

 🌟उपलब्धि: अल्ट्रा ट्रेल रनर और संस्थापक – मुन्दोली राइडर्स क्लब।

 🌟 सामाजिक कार्य: हिमालयी क्षेत्र के निर्धन वंचितों बच्चों की सहायता।

 🌟वर्तमान स्थिति: देहरादून में किराए के मकान में रहकर भी समाज सेवा में समर्पित।