अपने लिवर की करें सुरक्षा, समय पर जांच और इलाज से बच सकती है जिंदगी

देहरादून। लिवर हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने, भोजन को ऊर्जा में बदलने, पाचन में मदद करने, शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन बनाने और रोगों से लड़ने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन हेपेटाइटिस जैसी बीमारी धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाती है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई बार यह बीमारी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के बढ़ती रहती है और जब तक इसका पता चलता है, तब तक लिवर को गंभीर नुकसान हो चुका होता है। हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूक करना और समय पर जांच व इलाज के लिए प्रेरित करना है।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के लिवर एंड बिलियरी साइंसेज विभाग के कंसल्टेंट डॉ. विपुल गौतम ने बताया, वायरल हेपेटाइटिस आज भी दुनिया भर में लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का एक बड़ा कारण है। अच्छी बात यह है कि हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है और हेपेटाइटिस-सी का इलाज दवाओं से पूरी तरह संभव है। लेकिन कई मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है, जब लिवर को काफी नुकसान हो चुका होता है। इसलिए समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है।

हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित कई लोगों में शुरुआती वर्षों तक कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि, कुछ लोगों में आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया), लगातार थकान, भूख कम लगना, पेट में सूजन, उल्टी, पेशाब का गहरा रंग या बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में हेपेटाइटिस का इतिहास है या जिन्हें संक्रमण का खतरा अधिक है, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए। डॉ. विपुल ने आगे बताया, यदि लिवर की बीमारी बहुत ज्यादा बढ़ जाए और सिरोसिस या लिवर फेलियर हो जाए, तो केवल दवाओं से इलाज संभव नहीं रहता। ऐसे मरीजों में पेट में पानी भरना, बार-बार संक्रमण होना, खून की उल्टी, किडनी की समस्या या मानसिक भ्रम जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट मरीज की जान बचाने का सबसे प्रभावी इलाज बन सकता है।

आज लिवर ट्रांसप्लांट पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और सफल प्रक्रिया बन चुकी है। आधुनिक तकनीक, बेहतर सर्जरी और विशेषज्ञों की टीम की मदद से अधिकांश मरीज ट्रांसप्लांट के बाद सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। भारत आज लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। लिवर की खास बात यह है कि इसका एक हिस्सा दान करने के बाद भी डोनर और मरीज, दोनों का लिवर कुछ समय में फिर से विकसित हो जाता है।

अक्सर मरीज तब हमारे पास पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। अगर समय रहते जांच हो जाए, सही इलाज शुरू किया जाए और जरूरत पड़ने पर ट्रांसप्लांट की तैयारी पहले से की जाए, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। लिवर ट्रांसप्लांट को आखिरी विकल्प नहीं, बल्कि सही समय पर किया जाने वाला इलाज समझना चाहिए। विश्व हेपेटाइटिस दिवस हमें यह याद दिलाता है कि लिवर की सुरक्षा हमारे अपने हाथ में है। हेपेटाइटिस-बी का टीका लगवाएं, सुरक्षित जीवनशैली अपनाएं, जरूरत पड़ने पर समय पर जांच कराएं और पीलिया या लिवर की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी को कभी नजरअंदाज न करें। सही समय पर पहचान और इलाज से न केवल लिवर को बचाया जा सकता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर लिवर ट्रांसप्लांट के जरिए मरीज को नई जिंदगी भी दी जा सकती है।