राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं सैन्य अधिकारीः राज्यपाल - Pahadvasi

राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं सैन्य अधिकारीः राज्यपाल

-राज्यपाल ने आईएमए में जेंटलमैन कैडेट्स को किया संबोधित

देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में “भारतीय सैन्य अधिकारीः राष्ट्र निर्माता के रूप में” विषय पर जेंटलमैन कैडेट्स को संबोधित किया। इस अवसर पर भारतीय सैन्य अकादमी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नगेन्द्र सिंह सहित अकादमी के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशिक्षकगण उपस्थित रहे। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि यह वह पावन स्थान है जहाँ युवा कैडेट राष्ट्र सेवा, अनुशासन और नेतृत्व के मूल्यों को सीखते हैं। यहाँ एक कैडेट यह समझता है कि कर्तव्य को सुविधा से ऊपर, जिम्मेदारी को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर और राष्ट्र को स्वयं से ऊपर रखना ही एक सच्चे सैनिक की पहचान है।

उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी का दायित्व केवल सीमाओं की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक अधिकारी अपने नेतृत्व, अनुशासन और आचरण से समाज में विश्वास और स्थिरता की भावना को मजबूत करता है।

राज्यपाल ने कहा कि एक अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी उसकी प्रतिष्ठा होती है, जो उसके व्यवहार, निर्णय क्षमता और अपने जवानों के प्रति संवेदनशीलता से बनती है। एक अच्छा अधिकारी केवल आदेश देने वाला नहीं होता, बल्कि वह अपने सैनिकों की बात सुनने वाला, उनकी समस्याओं को समझने वाला और कठिन परिस्थितियों में उनके साथ खड़ा रहने वाला सच्चा नेतृत्वकर्ता होता है।

उन्होंने कैडेट्स को भारतीय इतिहास के महान योद्धाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महापुरुषों ने साहस, नैतिकता और दूरदृष्टि का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। आज के सैन्य अधिकारियों को भी इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि एक सच्चे सैन्य अधिकारी के लिए निरंतर सीखते रहना अत्यंत आवश्यक है। बदलते समय के साथ युद्ध की प्रकृति और तकनीक दोनों तेजी से परिवर्तित हो रही हैं, इसलिए अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, नवाचार और नई रणनीतियों को समझते हुए स्वयं को निरंतर अपडेट करना होगा। उन्होंने कहा कि एक आधुनिक सैन्य अधिकारी को केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक विचारशील और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता भी होना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि कूटनीति, सूचना, अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता के समन्वय से मजबूत होती है।

उन्होंने महिला कैडेट्स की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश की प्रगति और सशक्तीकरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारी भी अपने समर्पण, क्षमता और नेतृत्व से भारतीय सेना के गौरव को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगी।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सेना को देशवासियों का जो सम्मान और विश्वास प्राप्त है, वह पीढ़ियों से सैनिकों और अधिकारियों द्वारा दिखाए गए साहस, अनुशासन और सेवा भावना का परिणाम है। यही कारण है कि सेना के अधिकारी सेवा के बाद भी विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं।