40 दिन में दूसरी बार नर्सिंग अभ्यर्थियों ने किया सीएम आवास कूच - Pahadvasi

40 दिन में दूसरी बार नर्सिंग अभ्यर्थियों ने किया सीएम आवास कूच

देहरादून। वर्षवार नियुक्ति में अपनी अन्य मांगों को लेकर नर्सिंग अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार को देहरादून में नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले नर्सिंग अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया। लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को न्यू कैंट रोड स्थित हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। जिसके बाद नर्सिंग अभ्यर्थी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और वहां एक सभा का आयोजन किया। विगत 45 दिनों से एकता विहार स्थित धरना स्थल पर आंदोलनरत नर्सिंग एकता मंच ने आज मुख्यमंत्री आवास कूच किए जाने के साथ-साथ विरोध स्वरूप सामूहिक मुंडन कराए जाने का भी ऐलान किया था। लेकिन मंच के प्रतिनिधियों को उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर सुनीता टम्टा ने वार्ता के लिए आमंत्रित किया, जिसके बाद नर्सिंग एकता मंच ने अपने सामूहिक मुंडन कार्यक्रम को टाल दिया।

मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि नर्सिंग भर्ती पहले भी वर्षवार होती रही है। ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और सभी नर्सिंग अभ्यर्थियों को समान अवसर प्राप्त हो सकें। लेकिन वर्तमान में भर्ती प्रक्रिया को वर्षवार नहीं कराया जा रहा है, जो उनके हितों के विरुद्ध है। उन्होंने मांग उठाई कि लिखित भर्ती विज्ञप्ति को तत्काल निरस्त करते हुए नर्सिंग भर्ती को वर्षवार कराया जाए।

मंच का कहना है कि राज्य में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है और उससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। ऐसे में नर्सिंग अभ्यर्थियों के भविष्य और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक निर्णय ले। अन्यथा उनका यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

फिलहाल डीजी हेल्थ डॉ. सुनीता टम्टा से हुई बातचीत के बाद सभी अभ्यर्थी एकता विहार स्थित धरना स्थल लौट गए हैं। जहां पर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। गौर है कि इससे पहले 8 दिसंबर 2025 को भी नर्सिंग एकता मंच उत्तराखंड के बैनर तले सैकड़ों बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया था। इस दौरान अभ्यर्थियों की पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई थी। इस घटना में एक महिला पुलिस कर्मी ने महिला नर्सिंग अभ्यर्थी को थप्पड़ मारा दिया था। इस घटना का कई संगठनों ने कड़े शब्दों में विरोध किया था।

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